Pakistan_Air_Force_JF-17_Thunder_flies_in_front_of_the_26,660_ft_high_Nanga_Parbat

पाकिस्तान का रक्षा उद्योग, जिसने दशकों तक प्रतिबंधों और युद्धकालीन रोक को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया था, अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है जो निर्यात की संभावनाओं पर केंद्रित है। पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन ढाँचा प्रारम्भ में देश की अपनी सुरक्षा आवश्यक़ताओं  हेतु परस्पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ स्थापित किए गए थे। हालाँकि, अब पाकिस्तान एक उभरते हुए वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर रहा है। पिछले एक वर्ष में ही पाकिस्तान ने 13 अरब अमेरिकी डॉलर के संभावित निर्यात की माँग प्राप्त की है। यदि ये आदेश पूरे हो जाते हैं, तो यह देश के अभी प्रारम्भिक दौर में मौजूद, परंतु पिछले कुछ वर्षों से परस्पर अग्रसर हो रहे निर्यात में एक ज़बरदस्त उछाल को दिखाएगा।

रक्षा निर्यात लंबे समय से केवल व्यावसायिक लेन-देन के बजाय, राज-काज के साधनों के रूप में कार्यरत रहे हैं। सैन्य उपकरणों की बिक्री से स्थायी संस्थागत सम्बन्धों की स्थापना हो सकती है, जिनमें विमानचालक प्रशिक्षण, रखरखाव के अनुबंध, कलपुर्ज़ों की आपूर्ति और सैद्धांतिक आदान-प्रदान समिल्लित हैं। निर्यात करने वाले देशों के लिए, ऐसे संबंध दीर्घकालिक निर्भरताएँ पैदा करते हैं, जिससे रक्षा संबंध व्यापक कूटनीतिक और सुरक्षा ढांचे के भीतर प्रबलता से स्थापित हो जाते हैं।

ऐसे में, पाकिस्तान के पास अपने बढ़ते रक्षा औद्योगिक तंत्र को वैश्विक बाज़ार में प्रासंगिकता और कूटनीतिक प्रभाव दोनों में परिवर्तित करने का अवसर है। इस श्रेणी के सुस्थापित आपूर्तिकर्ता, जैसे कि तुर्की और दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान हेतु अनुकरण करने योग्य आकर्षक मार्ग प्रस्तुत करते हैं। चुनौतियों के बावजूद—जिनमें कलपुर्ज़ों के लिए आयात पर निरंतर निर्भरता, शासन संबंधी बाधाएँ और अभी भी प्रारंभिक अवस्था में अनुसंधान एवं विकास समिल्लित हैं—पाकिस्तान पहले से ही लागत के प्रति सजग खरीदारों के लिए विश्वसनीय सैन्य सामग्री के मध्यम-स्तरीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति प्रबल करने की राह पर अग्रसर है। 

पाकिस्तान पहले से ही लागत के प्रति सजग खरीदारों के लिए विश्वसनीय सैन्य सामग्री के मध्यम-स्तरीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति प्रबल करने की राह पर अग्रसर है।.

पाकिस्तान के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का विकास

अपने इतिहास के अधिकांश समय तक, पाकिस्तान की रक्षा संरचना भिन्न रही है, जिसमें प्रत्येक संस्थान और उत्पादन इकाई एक सीमित दायरे में कार्यरत थी: पाकिस्तान वैमनिकी तंत्र (विमान उत्पादन), भारी  उद्योग तक्षशिला (बख्तरबंद वाहन), पाकिस्तान शस्त्रास्त्र कारखाना (छोटे हथियार और गोला-बारूद) और कराची पोत प्रांगण एवं अभियांत्रिकी कार्य (नौसैनिक प्लेटफॉर्म) का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सेना की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं की पूर्ति करना था।

इस मॉडल का उद्देश्य यद्यपि अनुशासन और गोपनीयता बनाए रखना था, विशेषकर प्रेसलर संशोधन के बाद के दौर जैसे समय में, जब प्रतिबंध और प्रोदयोगिकी रोकने जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं। हालाँकि, इसने हर अलग संस्था के नवाचार करने की क्षमता को भी सीमित कर दिया, विशेषकर भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की प्रौद्योगिकी के मामले में। आखिरकार, इसने उभरती हुई प्रौद्योगिकी के विकास को रोक दिया, और निर्यात की संभावनाओं पर बहुत कम ध्यान केंद्रित दिया।

समय के साथ, उद्योग परिपक्व हुआ, और रक्षा तथा विमानन क्षेत्रों में प्रोदयोगिकी की सहायता से प्रगति हुई। इस प्रगति का एक मुख्य कारण स्वदेशीकरण पर बल देना था, जो प्रौद्योगिकी प्राप्ति पर रोक  की वजह से तीव्र हूई, जिससे स्वंय-सहायकता में अधिक वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त, भारत के साथ परस्पर चल रही प्रतिद्वंद्विता के कारण भी, पारंपरिक संतुलन बनाए रखने हेतु सेना के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया।

अब, 20 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन और 100 से अधिक निजी उद्यम रक्षा उपकरण के निर्माण के लिए मिलकर कार्यरत हैं। निर्यात के मामले में, विदेशी सौदों को सरलता प्रदान करने हेतु रक्षा निर्यात संवर्धन संगठन (डीईपीओ) की स्थापना की गई थी। यह रक्षा उत्पादों और सेवाओं की विदेशों में बिक्री में तालमेल बिठाने और देश के प्रमुख रक्षा एक्सपो ‘आईडीईएएस’ को आयोजित करने में सहायता करता है।

इस उभरते हुए पारिस्थितिकी तंत्र में एक और अहम उद्यम है ‘ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस’ (जीआईडीएस)—एक सरकारी समूह और पाकिस्तान के सबसे बड़े रक्षा निर्माताओं व सैन्य प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला के निर्यातकों में से एक। उत्पादन और निर्यात-उन्मुख केंद्रों का यह पारिस्थितिकी तंत्र, विश्व भर में आयोजित होने वाली कई रक्षा प्रदर्शनियों में पाकिस्तान की भागीदारी से ओर भी प्रबल होता है। यह भागीदारी पाकिस्तान के निर्यात-उन्मुख औद्योगिक आधार के क्रमिक विस्तार को रेखांकित करती है।

राष्ट्रीय विमानिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पार्क (एनएएसटीपी), जिसकी स्थापना 2023 में हुई थी, एक नया जुड़ाव है जो रक्षा क्षेत्र को, विशेष रूप से विमानिकी के क्षेत्र में, मज़बूती प्रदान करने में सहायक है। त्रिगुण हेलिक्स मॉडल पर आधारित एनएएसटीपी की इस प्रकार से रचना की गई है कि यह सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों, शोधकर्ताओं और सरकार के अंतिम-उपयोगकर्ताओं को एक छत के नीचे लाकर तकनीकी नवाचार पर सहयोग स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है। यह संस्थान अभी अपने प्रारम्भिक दौर में है, परंतु इसमें विमानिकी निर्माण और वैश्विक बाज़ार में संभावित निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनने की अपार क्षमता है। इसका एक तुलनात्मक उदाहरण ‘टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ इंक.’ (TUSAŞ) है; यह एक सरकारी स्वामित्व वाला उद्यम है जिसका प्रारंभ बहुत ही साधारण स्तर पर हुआ था, परंतु अब इसकी आज विश्व के शीर्ष सौ रक्षा उद्यमों में गिनती  की जाती है। इसका  उत्थान भी लगभग वैसी ही परिस्थितियों में हुआ था और इसने भी विमानिकी प्रौद्योगिकी के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित किया था।

इस विकास के परिणामस्वरूप, पाकिस्तान अब विभिन्न प्रकार की प्रणालियों का उत्पादन करता है, जिनमें हवा से सतह पर मार करने वाले हथियार, निगरानी पेलोड, स्टैंडऑफ हथियार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की सब-प्रणालियाँ शामिल हैं; इसके साथ ही वह धरती पर प्रयोग होने वाली प्रणालियों जैसे मुख्य युद्धक टैंक, छोटे हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी निर्मित करता है। इन सभी प्रणालियों के पास आईएसओ प्रमाणीकरण हैं और ये गुणवत्ता के नवीनतम मानकों का पालन करते हैं, जिससे ये निर्यात हेतु एक मज़बूत स्थिति में हैं।

इस ढांचे में, संयुक्त उत्पादन ने बहुत अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए हमेशा से संयुक्त उत्पादन का सहारा लिया है, जैसे कि सैन्य विमानों के लिए चीन के साथ सहयोग। संयुक्त रूप से विकसित जेएफ़-17 थंडर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है – कि कैसे पाकिस्तान ने अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का प्रयोग करके उन्नत विनिर्माण और रचना क्षमताएँ विकसित की हैं। जेएफ़-17 कार्यक्रम के अंतर्गत घरेलू स्तर पर असेंबली और प्रणाली एकीकरण को संभव किया है और पाकिस्तान को एक प्रणाली दी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विक्रेता बनाने में सक्षम और युद्ध में परखी हुई है।

इस सफलता के आधार पर, पाकिस्तान अब रक्षा उपकरणों के उत्पादन को दूसरे उप-क्षेत्रों जैसे कि बिना विमानचालक वाली प्रणाली और सटीक निशाना लगाने वाले हथियार तक अग्रसर की चेष्टा कर रहा है, ताकि उन्हें निर्यात किया जा सके। विश्व भर में रक्षा प्रदर्शनियों में पाकिस्तानी रक्षा प्रौद्योगिकी उद्यमों की बढ़ती मौजूदगी भी एक विविध औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र आधार की ओर धीरे-धीरे हो रहे परिवर्तन का संकेत देती है। इस प्रकार से, उत्पाद, घरेलू और वैश्विक साझेदारियाँ पाकिस्तान को हथियारों के एक मध्यम-स्तर के निर्यातक के रूप में स्थापित करने में सहायक है।

वैश्विक हथियारों के बाज़ार के मध्य-स्तरीय क्षेत्र में स्थान ग्रहण करना 

वैश्विक बाज़ार में अपनी अलग पहचान बनाने हेतु पाकिस्तान के प्रयास वैश्विक बाज़ार में चल रहे संरचनात्मक परिवर्तन के अनुरूप हैं। अमेरिका, चीन और रूस, नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क-केंद्रित उपकरणों सहित उच्च मूल्य वाले उत्पादों के वैश्विक बाज़ार पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। तथापि, इनकी अत्यधिक लागत कई देशों को इन्हें खरीदने से रोकती है और हाल के वर्षों में किफ़ायती सैन्य उपकरणों की माँग में वृद्धि हुई है। इस आपूर्ति श्रृंखला में पाकिस्तान का महत्व  संचालन की दृष्टि से पर्याप्त प्रणालियों की एक विविध श्रृंखला की प्रस्तुति में अंतर्निहित है, जिनकी विक्रयी लागत कम है और जो व्यापक माँग को पूरा करती हैं।

जेएफ़-17 थंडर इस माँग का स्पष्ट उदाहरण है। एक किफ़ायती बहु-भूमिका वाले विमान के रूप में विपणन किया गया, इसका मूल्य लगभग 25 से 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जबकि एसएएबी ग्रिपेन की क़ीमत लगभग 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। अमेरिकी प्लेटफॉर्म इससे भी अधिक क़ीमती है। इसके अतिरिक्त, कई पश्चिमी प्रणालियों की जीवनकाल रखरखाव लागत जेएफ़-17 की तुलना में कहीं अधिक है। साथ ही, म्यांमार और नाइजीरिया सहित जिन देशों ने पाकिस्तान से जेएफ़-17 खरीदी हैं, वे संभवतः इनका उपयोग आतंकवाद विरोधी अभियानों में करेंगे। इसलिए, उन्हें केवल एक विश्वसनीय प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है जो उनकी आवश्यक्तयों की पूर्ति कर सके और इस प्रकार, उन्हें अधिक स्थापित रक्षा निर्यातकों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अपेक्षाकृत महंगे उत्पादों में निवेश करने की आवश्यकता नहीं है। यह जेएफ़-17 को अधिक आकर्षक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है और पाकिस्तान को मध्य-स्तरीय विक्रेता बनने के वर्तमान प्रयास का एक केंद्रीय स्तंभ बनाता है।

शाहपर II और जीआईडीएस  द्वारा निर्मित आगामी शाहपर III सहित मानवरहित वाहन, लागत प्रभावी प्लेटफॉर्म की खोज कर रहे देशों के लिए एक और प्रतिस्पर्धी उत्पाद हैं। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान के अन्य रक्षा निर्यात उत्पादों में अल-खालिद जैसे युद्धक टैंक, सुपर मुश्शक जैसे बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण विमान, टैंक-रोधी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली, परिष्कृत सतह और पनडुब्बी नौसैनिक पोत, हवाई गोला-बारूद, छोटे हथियार और गोला-बारूद और विस्फोटकों की एक विस्तृत श्रृंखला समिल्लित है। 

रक्षा उद्योग में पाकिस्तान द्वारा हाल ही में प्राप्त की गई प्रगति एवं मध्य-स्तरीय क्षेत्र में इसकी बाज़ार क्षमता एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र की ओर संकेत करती है जो विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से बाहरी और भविष्योन्मुखी है। तथापि, पाकिस्तान अभी तक एक बड़ा सौदागर नहीं है, पर पाकिस्तान ने एक ऐसा स्थान ग्रहण करना प्रारम्भ किया है जिसके अंतर्गत उसका उद्देश्य-आयातक के बजाय आपूर्तिकर्ता के रूप में मध्य-स्तरीय बाज़ार में प्रवेश करना है।

रक्षा निर्यात और विदेश नीति में संबंध

पाकिस्तान लंबे समय से सैन्य प्रशिक्षण को अपने बाह्य संबंधों के एक घटक के रूप में उपयोग करता रहा है, विशेष रूप से खाड़ी देशों, अफ़्रीका एवं दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ। तकनीकी सहायता और आजीवन प्लेटफॉर्म रखरखाव सहित व्यवस्थाओं के साथ अपने रक्षा निर्यात का विस्तार इन संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अवसर प्रदान करता है। इसका एक उदाहरण लीबिया के साथ 4 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा है, जिसमें लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों के साथ-साथ व्यापक समर्थन, प्रशिक्षण, क्षमता विकास और सैद्धांतिक अनुकूलन समिल्लित है।

इस प्रकार का सहयोग दीर्घकालिक परिचालन संबंधी परस्पर निर्भरता को जन्म देता है, जिसमें प्राप्तकर्ता देश न केवल प्रारंभिक विक्रय हेतु  बल्कि प्लेटफॉर्म के पूरे जीवनकाल में संशोधनों, उन्नयन और तकनीकी विशेषज्ञता हेतु भी निर्यातक पर निर्भर रहता है। इससे स्थायी साझेदारियों का निर्माण होता है जिनमें द्विपक्षीय संबंधों के अन्य आयामों तक विस्तार करने की क्षमता होती है। 

इसके अतिरिक्त, यह सहयोगी देशों के बीच विश्वास-निर्माण को विकसित कर सकता है, जिससे अंततः संबंध सैन्य क्षेत्र से परे पारस्परिक हित के अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित हो सकते हैं। ऐसे संबंध पाकिस्तान को राजनयिक लाभ भी प्रदान कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब भारत राजनयिक साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए अपने सैन्य संबंधों का उपयोग करना जारी रखता है। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में भी ऐसे संबंधों का लाभ उठाया जा सकता है। 

[ढांचागत बाधा] अधिक नवीन शोधकार्य एवं विकास की आवश्यकता और कलपुर्ज़ों के लिए बाह्य साझेदार पर निर्भर है।.

संरचनात्मक बाधाएँ

हालाँकि, काफ़ी कुछ किया गया है, परंतु पाकिस्तान के रक्षा उद्योग को अपनी पूरी क्षमता विकसित करने हेतु अभी भी कई ढांचागत बाधाओं को दूर करना होगा।इनमें अभिशासन से जुड़ी चुनौतियाँ, अधिक नवीन शोधकार्य एवं विकास की आवश्यकता और कलपुर्ज़ों के लिए बाह्य साझेदार पर निर्भरता शामिल हैं। इस मामले में सबसे अहम मुद्दों में से एक है निजी उद्योग की अब भी कम भागीदारी। रक्षा क्षेत्र का अधिकतर हिस्सा सरकारी उद्यमों के हाथों में है। तथापि इससे सरकार को जवाबदेही तय करने के लिए आवश्यक नियंत्रण की क्षमता प्राप्त होती है, परंतु असली नवाचार तब होता है जब सार्वजनिक-निजी साझेदारी हो, जैसा कि दक्षिण कोरिया के मामले में देखा गया है। असल में, दक्षिण कोरिया ने विदेशी सैन्य सहायता, प्रबल भारी उद्योग और आत्मनिर्भरता की साफ़ नीति के आधार पर रक्षा उद्योग निर्मित किया है। पाकिस्तान अभी अपने उद्योग को विकसित करने की प्रक्रिया में है, परंतु रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर अधिक बल देने से उसके भविष्य के रक्षा निर्यात लाभान्वित होंगे। तुर्की एक और अच्छा उदाहरण है, क्योंकि उसने अपनी रक्षा आवश्यकताओं  की पूर्ति हेतु लगभग 80 प्रतिशत आयात करने की स्थिति से आगे बढ़कर, दो दशकों से भी कम समय में 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निर्यात प्रारम्भ कर दिया है। ऐसा करने का एक तरीका था आयात-प्रतिस्थापन से हटकर निर्यात-आधारित औद्योगीकरण की ओर अग्रसर होना और साथ ही निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी का लाभ उठाना समिल्लित है। सार्वजनिक-निजी भागेदारी और आत्मनिर्भरता पाकिस्तान हेतु दक्षिण कोरिया और तुर्की के मॉडल को अपनाने का पथ प्रदर्शित किया है।

नवाचार एक ऐसा क्षेत्र है जो  ऐतिहासिक रूप से नकारा गया, अब तक इसमें कम निवेश हुआ है। इसमें हमेशा आवश्यकता पड़ने पर ही प्रतिक्रिया दी गई है, न कि समय से पहले से ध्यान दिया हो। बदलते परिदर्श्य को देखते हुए,  सैन्य सामान का भरोसेमंद रक्षा निर्यातक बने रहने हेतु, पाकिस्तान को तीव्रता से नवाचार को अपनाने की आवश्यकता होगी। विशेष रक्षा प्रौद्योगिकी हेतु अनुसंधान एवं विकास एक ऐसा क्षेत्र है जो पाकिस्तान को अपनी विशेष आवश्यकताओं  हेतु पसंदीदा देश बना सकता है। सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और उप-प्रणाली हेतु आगत व्यवसाय का विकास एक और क्षेत्र है जो धीरे-धीरे निर्यातक के तौर पर पाकिस्तान की स्थिति में बेहतर कर सकता है। इससे अधिक-से-अधिक स्वदेशीकरण की ओर अग्रसर होने में भी पाकिस्तान को सहायता मिलेगी, जिससे बाह्य साझेदारों पर उसकी निर्भरता कम होगी।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान का रक्षा उद्योग धीरे-धीरे मध्य स्तरीय वैश्विक रक्षा बाज़ार में अधिक एकीकरण की ओर अग्रसर हो रहा है। एक अधिक नेटवर्क वाला पारिस्थितिकी तंत्र बनना और कूटनीति हेतु रक्षा सहयोग का प्रयोग करना एक दूरदर्शी रणनीति को प्रदर्शित करता है। यदि यह सिलसिला जारी रहता है, तो पाकिस्तान दूसरे विकासशील देशों के साथ बेहतर सम्बन्धों की स्थापना कर पाएगा और अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को प्रबलता प्रदान कर पाएगा। इस गति को बनाए रखना और विकसित करना अनिवार्य है; अन्यथा, पाकिस्तान न केवल मध्य स्तरीय रक्षा उद्योग में अपना स्थान ग्रहण करने का अवसर गंवा सकता है, बल्कि इसके साथ मिलने वाले आर्थिक लाभ, विदेशी मुद्रा और बेहतर तकनीकी सहयोग का लाभ उठाने में भी विफल रहेगा।

This article is a translation. Click here to read the original in English.

***

Image 1: Asuspine via Wikimedia Commons

Image 2: Hezmok Media via Wikimedia Commons

Share this:  

Related articles

مغربی ایشیا میں فضائی جنگ: پاکستان کے لیے اسباق Hindi & Urdu

مغربی ایشیا میں فضائی جنگ: پاکستان کے لیے اسباق

28 فروری 2026 کو امریکہ اور اسرائیل کا ایران پر…

इस्लामाबाद चैनल: मध्यस्था एवं अभिजात अस्तित्व   Hindi & Urdu

इस्लामाबाद चैनल: मध्यस्था एवं अभिजात अस्तित्व  

सन् 1971 के ग्रीष्म काल में, एक पाकिस्तानी सैन्य विमान…

بھارت کا عسکری تصوّر برائے 2047: ایک دُشوار راستہ  Hindi & Urdu

بھارت کا عسکری تصوّر برائے 2047: ایک دُشوار راستہ 

تاریخی طور پر متواتر بحرانات، وسائل کی کمی اور وقتی…